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Tuesday, January 15, 2019

HRTC भर्ती अधिसूचना 2019


HRTC भर्ती अधिसूचना 2019 (हिमाचल सड़क परिवहन निगम)


अंतिम दिनांक  = 01-02-2019
कुल  पदों की संख्या = 176
शैक्षिक योग्यता, आयु मानदंड, चयन मोड, महत्वपूर्ण तिथि और अन्य पात्रता प्रक्रिया से संबंधित अधिक जानकारी के लिए कृपया नीचे दिए गए लेख को ध्यान से पढ़ें। आवेदन करने से पहले आधिकारिक विज्ञापन को भी विस्तार से अवश्य पढ़ें।

HRTC भर्ती अधिसूचना 2019
176 पदों की कुल संख्या

पोस्ट का विवरण-

1. ड्राइवर - 176 पद

शैक्षिक योग्यता - उम्मीदवारों को किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 10 वीं या इसके समकक्ष योग्यता पूरी की होनी चाहिए। पूर्ण विवरण के लिए आधिकारिक विज्ञापन भी देखें।

आयु मानदंड- उम्मीदवारों की आयु 01-01-2019 को 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आयु में छूट नियमानुसार लागू होगी। आगे की पोस्ट वार आयु विस्तार के लिए नीचे दिए गए महत्वपूर्ण लिंक पर जाएं।

देय शुल्क: सभी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क है - 200 / -।


वेतनमान:  7700 / - प्रति माह।

महत्वपूर्ण तिथियां - सभी पात्र और वांछित उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे 01-02-2019 से पहले ऑफलाइन मोड के माध्यम से आवेदन करें।

पता - हिमाचल सड़क परिवहन निगम, शिमला - 171003।


Note:- For more information comment in comment box.





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Wednesday, November 14, 2018

भूकंप एक संकट एवं प्राकृतिक आपदाएं प्रबंधन

सरकारी व सामाजिक स्तर पर भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के उपरांत सभी सरकारें तत्काल राहत व सहायता उपलब्ध कराती है भारत जैसे देश में जहां जनसंख्या के घनत्व अधिक जनहानि अधिक होती है और सच है कि देश में भूकंप लेखन या मापन यंत्र का जाल बिछा दिया जाए आज के भूगर्भ में होने वाली हलचल का ज्ञान होता है जब कभी तीव्र गति के भूकंप आने की संभावना छेत्र विशेष के लोगों को प्रचार माध्यमों के द्वारा से जग कर दिया जाता है

व्यक्तिगत स्तर पर भूकंप आने पर एहसास होने पर व्यक्तिगत स्तर पर तत्काल कुछ नहीं होने चाहिए जैसे सभी घरों से बाहर खुले जगह पर जाने को कह ना बिजली तथा गैस बंद कर देनी चाहिए फालतू जीवो को बंधन मुक्त कर देना चाहिए यह उपाय इसलिए कि जाने संभव है कि तीव्र भूकंप आने से पहले कुछ समय तक हल्के झटके लगते हैं जिससे मानव को बुक कब आने का आभास होता है
संकट की घड़ी में व्यक्ति को एकता का परिचय देना आवश्यक होता है जाति धर्म व संप्रदाय के बंधनों से मुक्त होने मानवीय संवेदना के कारण मुक्त हस्त से तन मन धन से सहायता करनी चाहिए इससे मानवीय संबंध और प्रगाढ़ होते हैं भारत में लोगों ने मिलकर सदैव पीड़ितों की सहायता करने के अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किए हैं
भू संकलन
मिट्टी तथा चट्टानों का ढलान पर ऊपर से नीचे की ओर खिसक ने लूटा गने तथा देने की प्रक्रिया को भू संकलन कहते हैं वह संज्ञान यदि बहुत बड़ी परिणाम में होता है तो उसे क्षेत्र में गड़गड़ाहट की आवाज धीरे धीरे शुरू होती है बाद में तेज आवाज के साथ मलबा नीचे की और गिरता है
भू संकलन के कारण
भूस्खलन के लिए किसी एक कारण को उतरता ही नहीं माना जा सकता है अपितु का कारक मिलकर पूछ संकलन जैसी आपदाओं को जन्म देते हैं प्राकृतिक कारण इसमें चट्टानों की संरचना भूमि का ढलान चट्टानों में वर्णन वर्णन वर्षा की मात्रा वनस्पति का अनावरण अधिकार प्रमुख है नवीन मोरदार पर्वत क्षेत्रों में भू संकलन अधिक होते हैं क्योंकि वहां उत्थान की सतत प्रक्रिया के कारण चट्टानों के जोड़ों कमजोर होते रहते हैं वह भी अधिक होता है इससे में वर्षा हो जाए तो वह सनन का काम करती है
मानवीय कारण भू संकलन जैसी प्राकृतिक आपदा को मानव ने नियंत्रित विकास के कारण और अधिक बढ़ा दिया जाए वन विनाश से चट्टानों में बेटियों पर वृक्षों की जड़े अपनी मजबूत पकड़ को छोड़ देती है ते मर्दा अपरदन प्रारंभ हो जाता है यही मर्दा प्रधान धीरे धीरे भू संकलन का रूप ले लेती है सड़कें रेल मार्ग सुरंगों के निर्माण तथा खनन के रूप में मानव भू संकलन को बढ़ावा देते हैं

भू संकलन  प्रर्वत क्षेत्र
भारत में भूस्खलन हिमालय क्षेत्र में अधिक होता है इसके बाद पश्चिमी घाट क्षेत्र में इन क्षेत्रों में जहां नदियों के प्रवाह क्षेत्र में है वहां पर संज्ञान अधिक होता है पूर्वोत्तर भारत और जम्मू कश्मीर क्षेत्र में ध्यान नहीं सड़कों का निर्माण कार्य हुआ है उन क्षेत्रों में भी भू संकलन अधिक होता है समुद्री किनारों पर सागरों के अपरदन के कारण भी भू संकलन होता है नदियों के मार्ग अवरुद्ध कर देता है तो कहीं आग वाला गमन के मार्गों को अवरुद्ध कर देता है मार्ग अवरुद्ध होने से जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाते हैं मांग व पूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है आबादी वाले क्षेत्रों में होता है तो उसे जन धन दोनों की हानि होती है लोग मकान के मलबे के ढेर में दब जाते हैं उत्तरांचल में भी भारी जन धन की हानि होती रहती

भू संकलन और से नदियों के मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं तथा वहां स्थाई झील बन जाती है यह दिल जब कभी टूटती है तो बाहर से जन धन की हानि होती है केदारनाथ में आई बाढ़ इसका उदाहरण है
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Tuesday, October 23, 2018

भारत की महत्वपूर्ण शब्दावली ओं का संक्षिप्त वर्णन

 शून्यकाल
               संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल के ठीक बाद के समय को शुन्यकाल कहा जाता है यह 12:00 बजे प्रारंभ होता है और एक बच्चे दिन तक चलता है शून्यकाल का लोकसभा या राज्यसभा की प्रक्रिया तथा संचालन नियम में कोई उल्लेख नहीं है इस काल अर्थात 12:00 से 1:00 तक के समय को सुनने काल का समय समाचार पत्र द्वारा दिया गया इस काल के दौरान सदस्य और लंबित मामलों को उठाते हैं पर तुरंत कार्रवाई जाते हैं
नोट वर्तमान में शून्य काल 1:00 बजे से 2:00 बजे तक चलता है
सदन का स्थगन सदन का स्थगन द्वार सदन के कामकाज में विनिर्दिष्ट समय के लिए स्थगित कर दिया जाता है यह कुछ घंटे दिन या सप्ताह का भी हो सकता है जबकि सत्रावसान द्वारा क्षेत्र की समाप्ति हो
 विघटन विघटन केवल लोकसभा का ही हो सकता है इसलिए लोकसभा का अंत हो जाता है
अनुपूरक प्रश्न
                   सदन में किसी सदस्य द्वारा अध्यक्ष की अनुमति में किसी विषय जिसके संबंध में उत्तर दिया जा चुका है कि स्पष्टिक कराने हेतु अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति प्रदान की जाती
तारा किंग प्रश्न जिन प्रश्नों का उत्तर दीजिए तुरंत सदन में चाहता है उसे तारा की पसंद आ जाता है तारा की प्रश्नों का उत्तर मुखी किया जाता है तथा तारा किट प्रश्नों के अनुपूरक प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं इससे प्रसन्न का ताला लगाकर अन्य प्रश्नों से इसका भेद किया जाता है
ए तारा कीट पर्सन जिन प्रश्नों का उत्तर सदस्य लिखित चाहता है उन्हें तारा के तारा कीट पर्सन कहा जाता है ऐसा राखी प्रश्न का उत्तर सदन में नहीं दिया जाता है और इन प्रश्नों का अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछे जाते हैं
स्थगन प्रस्ताव स्थगन प्रस्ताव पेश करने का मुख्य उद्देश्य किसी और लव फिल्म में नहीं है लोक महत्व के मामले की वह सदन का ध्यान आकर्षित करना है जब इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है तब सदन एल आई विल बी न लोकमत वैकेंसी मामले पर चर्चा करने के लिए सदन का नियमित कार्य रोक देता है इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्यों की स्वीकृति आवश्यक है
अल्प सूचना प्रश्न जो पर्सन विलंबित लोग मैच में क्या हुआ था वह साधारण पर्सन के लिए निर्धारित 10 दिन की अवधि से कम सूचना देकर पूछा जा सकता है उन्हें अल्प सूचना प्रश्न कहा जाता है
संचित निधि संविधान के अनुच्छेद 266 में संचित निधि का प्रावधान है संचित निधि में धन संसद में प्रस्तुत अनुदान मांगों के द्वारा ही वे किया जाता है राज्यों को करो एवं शुल्क में से उनका अंश देने के बाद जो धन बढ़ता है निधि में डाल दिया जाता है राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक आदि के वेतन तथा भत्ते इसी निधि पर भारित होता है
आकस्मिक निधि संविधान के अनुच्छेद 267 के अनुसार भारत सरकार एक कश्मीर नीति की स्थापना करेगी इसमें जमा धनराशि का विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार किया जाता है संसद की स्वीकृति के बिना इस मंत्र से धन नहीं निकाला जा सकता है विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति अग्रिम रूप से इस निधि से धन निकाल सकता है
आधे घंटे की चर्चा जिन प्रश्नों का उत्तर सदन में दे दिया गया हो उन प्रश्नों से उत्पन्न होने वाले मामलों पर चर्चा लोकसभा में सप्ताह में 3 दिन दिया था सोमवार बुधवार तथा शुक्रवार को बैठने के अंतिम आधे घंटे में की जा सकती है राज्यसभा में ऐसी चर्चा किसी दिन जिस सभापति नियत करें सामान्य 5:00 से 5:30 के बीच की जा सकती है ऐसी चर्चा का विषय पर्याप्त लोकमत वे का होना चाहिए तथा विषय हाल के किसी तारा के तारा की योजना का पंजा हो और जिनके उत्तर में के किसी अज्ञात मामला का स्पष्टीकरण आवश्यक हो ऐसी चर्चा को उठाने की सूचना कम से कम 3 दिन पूर्व दी जानी चाहिए
अल्पकालीन चचाई भारत में इस प्रथा की शुरुआत 1953 ईस्वी के बाद हुई इसमें लोक साहित्य के प्रश्न पर सदन का ध्यान आकर्षित किया जाता है इस चर्चा के लिए स्पष्ट कारणों सहित सदन के महासचिव को सूचना देना आवश्यक है आता है इस सूचना पर कम से कम दो अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर होना भी जरूरी है
विनियोग विधेयक विनियोग विधेयक में भारत की संचित निधि पर भारित व्यय की पूर्ति के लिए संघ से पिक धन तथा सरकार के खर्चे तो अनुदान की मांग शामिल होती है भारत की संस्कृति में से कोई धन विनियोग विधेयक जीन ही निकाला जा सकता है
लेखा अनुदान जैसा की विधित है विनियोग विधेयक के पारित होने के बाद ही भारत की संचित निधि से कोई रकम निकली जा सकती है किंतु पर सरकार को इस विधेयक के प्रयोग होने के पहले भी रुपयों की आवश्यकता हो सकती है अनुच्छेद के अंतर्गत लोकसभा लेखानुदान पारित कर सरकार के लिए राशि मंजूर कर सकती है जिसके बारे में विवरण देना सरकार के लिए

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Wednesday, October 10, 2018

इस किशन के ह्रदय को आप जानकार हीरां रहव जाओगे जरूर पढ़ें

किसानों के ह्रदय सम्राट , आमजन हितैषी , नैक निर्भीक ,
स्वाभिमानी , राजनीति में ईमानदारी के प्रतिमान ,
सादगी एवं सच्चाई की प्रतिभूति , कठोर व रौबदार
आवाज के धनी , स्पष्ट व बेबाक वक्ता , कुशल प्रशासक ,
उच्च कोटि के विधिवेत्ता , सहकारिता के पुरोधा परम्
आदरणीय स्व.#परसराम_मदेरणा"साब"#को उनकी जयन्ती पर #पुर्व_संध्या पर सादर #श्रध्दांजलि अर्पित करते हैं ।

अपने स्वाभिमान व किसान हितों को ताक पर रखकर
उन्होंने कभी भी किसी भी पद अथवा प्रलोभन के साथ
समझौता नहीं किया और अपने पूरे जीवन में राजनीति के
स्थान पर लोकनीति को अपनाते रहे ।
जो #परसराम_मदेरणा ने कह दिया - सो कह दिया"
इस सिध्दान्त को जीवन मे, समाज मे, राजनीति मे
निर्वाह करने वाले धुन के पक्के, कथनी को करनी मे
बदले वाले, दल मुक्त राजनीति मे विश्वास कर जीवन
भर निस्वार्थ किसानो की सेवा करने वाले
ईमानदार, औजस्वी आवाज व रोबदार चेहरे से प्रशासन
पर अपनी मजबूत पकङ रखने वाले युवाओ के प्रेरणा पुंज
है |

प्रदेश कि राजनीति के लोह्पुरुष परसराम मदेरणा 16
फरवरी 2014 को सदा सदा के लिए मौन हो गए !
लेकिन वे स्मृतियों में सदैव एक युग पुरूष , निस्पृह
कर्मयोगी और कर्मठ जनसेवक के रूप में याद किए
जायेगे !
बहुत कम लोगो को मालूम होगा कि परसराम
जी मदेरणा प. जवाहरलाल जी नेहरू के गहरे संपर्क में थे ,
नेहरू जी के साथ मदेरणा साब ने अनेक दौरे किए !
इंदिरा गांधी ने सदैव उनकी शख्सियत को अहमियत
दी !
राजीव गांधी ने इस रिवायत को निभाया !
मदेरणा साब संभवतया देश के इकलौते राजनेता थे ,
जिन्होंने अपनी जिंदगी में से करीब सतर वर्ष
महात्मा गांधी के दृढ उसूलो पर चलते हुए हरेक रविवार
को मौन रखा !
'श्वेत गांधी टोपी' आजीवन साब के व्यक्तित्व
कि पहचान रही !
संभवतः साब राजस्थान के पहले ऐसे नेता थे जिनसे कांग्रेस
के तीन अध्यक्ष इन्दिरा गांधी , राजीव गांधी व
सोनिया गांधी खुद मिलने जयपुर आवास पर आए ।
साब की दिल्ली तक सीधी एन्ट्री थी ।
साब आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके प्रखर
व्यक्तित्व का सौरभ , कालजयी व्यक्तित्व व दिव्य स्मरण
जन मानस को प्रेरणा देता रहेगा ।
उनकी अभिव्यक्ति का दंबग लहजा प्रजातंत्र में आस्था
रखने वाली भारतीय जनता को सदैव अपनी आवाज़ बुलंद
करने की प्रेरणा देता रहेगा ।

यादों में अमर रहेगें "साब "

शत् शत् नमन् .... ।

#नोट:- #मदेरणा_परिवार की और से #साहब_की_जयन्ती पर कल #पारिवारिक_शोक के कारण किसी भी प्रकार का कार्यक्रम नहीं रखा गया है।
 किसा राजनीति को परिभाषित करने वाले परम् आदरणीय श्री परसरामजी मदेरणा साहब की जयंती पर आपको श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए,

"साब" की लम्बी सोच एवं उच्च विचारों को शब्दों में लिखना तो दूर की बात है हम तो आपकी सोच को समझ ले तो ही किसान वर्ग के लिए उपलब्धि से कम नही है।

देश मे लोकतंत्र को अमलीजामा पहनाने वाले मदेरणा साहब राजनीति से परे सिद्धान्तों पर अडिग रहनेवाले है, जब धौलपुर महाराजा मानसिंह की हत्या से आक्रोशित किसान समुदाय को शांत करने के लिए आलाकमान ने साब को मुख्यमंत्री की कुर्सी ऑफर की गई थी लेकिन साब ने यह कहते हुए कुर्सी ठुकरा दी कि एक जाट की हत्या हुई है, कुर्सी से ज्यादा हमारे जाट भाई से प्रेम है।
आज राजनीति की एक एक नशे किसानपुत्रों की बदौलत चलती है उसकी वजह मदेरणा साहब है, उस जमाने मे संसाधनों की कमी थी ही साथ ही सामंती ताकते हावी थी, लोग वोट देने से डरते थे, तब आपने ऊँटो पर घर घर जाकर किसान वर्गों जागरूक एवं संगठित किया। परिणामस्वरूप वह समय भी आ गया जब सेठ, साहूकार एव ठाकुर लोग भी साहब के दर्शन करने दरवाजे पर खड़े मिलते थे।आप सरकार रहते हुए किसानों के ऐसे कई कानून बना दिए। जो युगों युगों नहीं भूल पाएंगे।आप कुशल राजनेता के साथ एक अच्छे विधिवेता थे जो किसानों के हक के लिए अधिनियम बनाये।वो खुद ड्राफ्टिंग करते थे।ऐसे नेता बहुत कम ही मिलते हैं।आजकल तो कानून आईएएस अधिकारी बनाते हैं।तभी तो भूमि अधिकरण जैसे बिल लेकर आ गए।काश वहां ऐसे नेता होते तो किसान विरोधी कानून नहीं बना पाते।
इतना ही नही, साहब अपने हुलिए से हाई कमान को हिलाकर रख देते थे। राजस्थान के एकमात्र नेता थे जिनके घर आकर हाईकमान हाजरी लगाते थे।
किसान वर्ग आपका जन्मों जन्मों तक ऋणी रहेगा।
कल 6,10,18 सुबह 10,30am पर श्री महिपाल जी मदेरणा जोधपुर से कृष्णनगर चाडी जाते समय ओसियां मैं  चाडी चौराया ओसियां पर कार्यकर्ता से रूबरू होंगे आप जरूर पधारे,,, अपने मिलने वाले मित्रगण व  कांग्रेसी कार्यकर्ता को भी समाचार करके साथ लाये,,,,,,,एक दूसरे को आगे से आगे कॉल या मेसेज करके बोले सा,,,,,,,
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Monday, October 8, 2018

भारत में ब्रिटिश शासन के अवसान के के कारण सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों का उद्देश्य

धार्मिक स्थान और भारत के इतिहासिक गौरव के प्रतिशत अभाव के कारणधार्मिक भावना विकसित करने का कार्य किया है समाज भारतीय संस्कृत चेतना राष्ट्रवाद अगर राजा राममोहन राय या मम्मी व्यक्तित्व के ध उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की उस समय ब्रिटिश साम्राज्य के विरूद्ध संघर्ष करना संभव नहीं था इसलिए उन्होंने राजनीतिक जागृति का कार्य जारी रखकर अंग्रेजी लेकिन एक बार फांसी सहित अनेक भाषाओं के जानकार श्री राय ने अपने विचारों के प्रचार के लिए अकबर फ इससे आम जनता उनके विचार जानने सके राम मोहन राय स्वतंत्रता के समर्थक व प्रशासन में सरकारी केजि सेना के बावजूद भारतीय जनमानस में राष्ट्रवाद की भावना पैदा कर दी pp यह किसके पुत्र भाई भाई बताकर भेदp आम भारतीयआम भारतीय विशेष भारतभारत के लोगों ने स्वामी गांव की संस्कृति हो रहा है तब इन्होंने पूरे विश्व में हिंदू संस्कृति को विश्व विख्यात किया और लोगों में दारू में राजनीतिक चेतना जागृत की दुनिया दूसरी महिला मैडम अमेरिका ऑल उन्होंने इन्हों लोगों को हिंदू धर्म संस्कृति को श्रेष्ट बताया और धर्म सुधार के कार्य की सन 18 13 में आयरलैंड की श्रीमती एनी बेसेंट ने इस कार्य को गति प्रदान की तथा भारत में वैचारिक क्रांति की धार्मिक ब्रिटिश राज्य अवस्था भारतीय विद्या से पूरी तरह बिनती देशी राज्यों में धार्मिक संस्थाओं कवियों कलाकारों को कर मुक्त जायदाद ने बंद कर दिया नई मुसीबत में आ गया अंग्रेजीअंग्रेजी की न्याय व्यवस्था भारतीय महंगी दिल का नहीं अपितु प्रशासनिक दृष्टि से भी दोस्तों की आम राजकाज की भाषा अंग्रेजी हो जाने के कारण लोगों की कठिनाइयां बढ़ गई भारतीयों को अंग्रेजी की तुलना में दृष्टि से देखा जाता था स्तर पर शिक्षा का प्रभाव लॉर्ड विलियम बैटिंग के समय में क्या ग्रेविटी सरकार इससेइससे जहां एक और वर्ग तो वहीं दूसरी ओर दूसरे लोग वर्ग द्वारा विदेशी साहित्य पढ़ने से उनकी स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था बढ़ने लगी और उन्होंने ब्रिटिश सरकार से उसी भाषा में सवाद कर अपने अधिकार प्राप्त के लिए संघर्ष किए अंग्रेज शिक्षा के कारण सामाजिक एवं धार्मिक कृत्यों से भारतीयों का इन होने लगा के कारण भारत में डॉक्टर इन लोगों ने भारत में राष्ट्रीय जागृति भूमिका निभाई
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आंख में तात्या टोपे धौलपुर में विद्रोह करौली अलवर बीकानेर में विद्रोह

टोंक के नवाब वजीर दूल्हा अंग्रेज समर्थक के प्रति टंकी अजंता एवं सेना की सहानुभूति क्रांतिकारियों के साथ ही सेना का एक बड़ा बार विद्रोह से मिल गया था इन सैनिकों के नीमच के सैनिकों ने के साथ नवाब के किले को घेर लिया सैनिकों ने नवाज सपना वसूल कर लिया और नीमच की सेना के साथ दिल्ली जाने टोन पहुंचने पर जनता तात्या टोपे को सहयोग दिया वे टो के जागीदार नसीर अहमद खान ने भी तात्या टोपे का साथिया जग्गी नवाब ने अपने आपको किले में बंद कर दिया धोलपुर महाराजा भगत सिंहटोन प अकबर 1857 में ग्वालियर तो इंदौर के क्रांतिकारी सैनिकों ने धौलपुर में प्रवेश किया धौलपुर राज्य की सेहत अधिकारी क्रांतिकारी से मिल गए विद्रोही ने 2 महीने तक राज्य में अपना अधिकार बनाए रखा दिसंबर का 57 में बाढ़ पटियाला की सेना में धौलपुर से क्रांतिकारी को भगा दिया भरतपुर की सेना विद्यालय विद्रोह को दबाने के लिए भेजी गई परंतु दूर कि मैं जनता के क्रांतिकारियों के साथ छोड़ दिया मगर करौलीकरौली के साथ करौ हेलो बेबी क्लॉथ बंधन सिंह ने अंग्रेजों की संस्था का सेनापति अलवर राज्य की जनता की राष्ट्रीय भावना उसे अधिकारियों के साथ शरदा सिंह विद्रोह को दबाने बीकानेर आज आ रहा है महाराज ने पंजाब व करंट तो सुरक्षा भी प्रदान किया गया चरणों पर महाराज ने कड़ा रुख अपनाकर उन पर नियंत्रण रखा मेवाड़ के महाराणा सरूपे ने अपनी सेना विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों की सहायता करने अपने अपने आपने सरकार के दोनों को एक दूसरे के क्रांति गाने बजाओ शाहपुरा मेवाड़ का हिट गाना था शाहपुरा के शासक ने क्रांतिकारियों को सहयोग प्रदान किया व्यवहार की सेना क्रांतिकारियों का पिक्चर करते हुए पकड़ा गया परंतु पुराने किले के दरवाजे नहीं महाराणामहाराणा अंग्रेजी का स्वर्ण तथा सुरक्षा भी प्रदान की लेकिन राज्य की जनता रोशनी दिमाग का जनता ने विद्रोह के दौरान रेजिडेंट को गालियां निकाल कर गा अपने गुस्से का इज़हार किया मेवाड़ के सलूंबर के कोठारिया में शामिल तो अपने क्रांतिकारियों को सहयोग दिया इंसान मिथुन एक और ठाकुर कुशाल सिंह में ताजा टॉपर की सहायता 57 की क्रांति का संपूर्ण राजस्थान की जनता ने अंग्रेजी सरकार जिस प्रकार बात में क्रांति का आंदोलन ठीक उसी प्रकार राजस्थान और विशेष रूप से दक्षिण राजस्थान में गोविंद गिरी के नेतृत्व में आदिवासी क्षेत्र में क्रांति आंदोलन का सूत्रपात किया गया गोविंद गिरी केठीक दक्षिण राजस्थान के गुजराल और मालवा वीडियो को संगठित कर उनकी पत्नी रात बुराइयों को समाप्त करने का प्रयास किया इसी के साथ अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध लोगों को एक सामाजिक सुधारों की जानकारी अपने गुरु गोविंद सामाजिक सुधारों डांस दीवाना की प्रगति के लिए 1913 में बांसवाड़ा की मांगे पानी को भी अपने गुरु गोविंद गिरी के नेतृत्व में धार्मिक और सामाजिक तथा राष्ट्रीय कार्यक्रम में व्यस्त हैं अंग्रेजी सरकार ने सभी भक्तों पर बिना सूचना के गोली मारकर के उनके बड़ी हीसामाजिक सुधा प्रतिक्रिया स्वरुप इन सभी क्षेत्रों के बिलों में राजनीतिक और राष्ट्रीय जागृति उत्पन्न हो गई वह सभी राष्ट्रीय आंदोलन में गोविंद गिरी के मार्ग का अनुसरण करते हुए मेवाड़ में प्रजामंडल आंदोलन कब आरंभ हुआ
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Sunday, October 7, 2018

शक्ति पृथक्करण सिद्धांत के गुण गुण एवं आलोचनाएं निष्कर्ष

सत्ता का विकेंद्रीकरण शक्तियों का केंद्रीकरण भ्रष्टाचार एवं अत्याचार की संभावना को जन्म देता है शक्ति पृथक्करण 57330 भागों में विभक्त सरकार के समस्त कार्यों की श्रेष्ठ एवं गतिशीलता प्रदान करता है शक्ति पृथक्करण सिद्धांत का सबसे बड़ा लाभ यह केस के व्यवहार में उपयोग में लाने सरकारी अथवा बिल्कुल शासन की स्थापना नहीं हो सकती मान टेक यूजर प्रेक्षण तथा पाकिस्तान जैसे विद्वानों ने आधार में शक्ति पृथक्करण सिद्धांत का प्रतिपादन किया था बाद में शक्तिमान एंड सिद्धार्थ स्वच्छता रिएमन निर्गुण शासन का अंत कर नागरिकों के व्यक्तित्व शक्ति पृथक्करण के चलते शासन का कोई भी अंग नागरिक स्वतंत्रता स्वतंत्रता में एक ओर जहां कानून निर्माण के लिए व्यापक दृष्टिकोण एवं दुर्दशा की न्याय की स्थापना के लिए मिक्स एंड सत्य सत्य में अंतर शासन शक्तियों के समुचित की रवानी है तथा तांत्रिक आचरण के लिए विभिन्न प्रतिभाशासन शक्तियों के समुचित की रवानी है तथा तांत्रिक आचरण के लिए विभिन्न पर सख्ती बरतीपर सख्ती बरती गण सिद्धांत की आलोचना माधवपुर आलोचना की जाती है लोकतांत्रिक आधुनिक समय में प्रजातंत्र के विकास के परिणाम स्वरुप लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को बल मिला है आते सरकार के कार्यों में भर्ती हुई है तथा जनक अंसारी भी बढ़ रही है प्रजातंत्र में जन आकांक्षाओं को वर्जिनिटी व्यवस्थापिका करती है ऐसे में कई बार न्यायपालिका की स्वतंत्रता के जनकारी कार्य में बाधा लोकतंत्र की मूल भावना को नष्ट कर सकती है शक्तिशक्ति पृथक्करण सिद्धांत स्वतंत्रता के लिए आवश्यक नहीं शक्तिशक्ति पृथक्करण सिद्धांत किंतुकिंतु वास्तव में शासन का एक माता की चौकी कल्पना के अनुसार शासन के तीन मकानों के बीच भेद करना संभव नहीं है पुणे लागू करने पर भारी कठिनाइयों में कार्यपालिका और इसे लागूइसे लागू करने पर व्यस्तता के बीच संतुलन रखना नितांत आवश्यक है इसलिए इस शक्ति पृथक्करण के स्थान पर नियंत्रण और संतुलन का सिद्धांत अधिक उपयोगी जिसमें केवल एक-दूसरे के कार्यों में अपने करें बल्कि किसी और को कानूनी मान्यता की भूमिका पर कानून को इस कार्यइस कार्य इस कार्यपालिका के निर्गुण संचरण परिस्थिति का का प्रबंध हेलिक्स का न्याय के लिए न्यायपालिका कार्यपालिका व्यवस्थापिका के दबाव से स्वतंत्र होना आवश्यक है कि न्यायपालिका पर भी नियंत्रण तथा अमेरिका में संविधान का अतिक्रमण करने तथा नियंत्रण संतुलन के सिद्धांत का प्रमुख उद्देश्य शासन के तीन लोगों को अपने सैनिक का मर्यादा में रखना है कि शासन की कार्यकुशलता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने का सिद्धांत का अर्थ वास्तविक कार्यपालिका न्यायपालिका को स्वतंत्रता विधि निर्माण विधि का शासन एवं विधि के अनुसार न्याय की व्यवस्था पर नियंत्रण सिद्धांत का विकास
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राजस्थान में पर्यटन विकास की संभावनाएं

राजस्थान में पर्यटन विकास की संभावनाएं :-
                                                                  राजस्थान के लिए पर्यटन उद्योग वरदान सिद्ध हो सकता है। राजस्थान विविधताओं ,जिज्ञासाओं और विचित्रताओं से भरा हुआ प्रदेश है। आज विश्व में राजस्थान की अद्भुत कठपुतली कला, लोक संगीत , भोजा , लंगा , मांगणियार मशहूर है। राजस्थान प्राचीनतम और शिल्प समृद्ध मंदिरों , अद्भुत और बेजोड़ स्थापत्य कलाओं से भरा पूरा प्रदेश है जिन्हे देखने के लिए दुनिया के व्यक्ति लालायित रहते है।

   राज्य में एडवेंचर टूरिज्म की पर्याप्त संभावना है। इसके अलावा वाटर सफारी , ग्रामीण पर्यटन ,इको टूरिज्म , फार्म टूरिज्म , एजुकेशनल टूरिज्म द्वारा भी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।

  राजस्थान में पर्यटन विकास के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा उपलब्ध है। राज्य में 2006 - 07 में पर्यटकों के लिए 38 होटल , 35 हेरिटेज होटल , 48 पर्यटक स्वागत और सूचना केंद्र, 3 यात्री निवास , 22 मिडवे और मोटल थे।
जयपुर में अन्तरार्ष्ट्रीय हवाई अड्डा बन जाने से विदेशी पर्यटकों में अच्छी वृद्धि हो रही है।

राजस्थान में पर्यटन के विकास हेतु राज्य सरकार अनेक कार्यक्रम चला रही है जिसमे महत्वपूर्ण है -
1. पर्यटन साहित्य का प्रकाशन एवं प्रचार - प्रसार।
2. ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण उपलब्ध कराना।
3. ऐतिहासिक स्मारकों को संरक्षण एवं रख - रखाव।
4. पर्यटक गाइड की व्यवस्था।
5. मरु मेलों का आयोजन।
6. शाही रेलगाड़ी ( palace on wheels ) का प्रारम्भ करना।
7. पैकेज टूर कार्यक्रम जैसे स्वर्ण त्रिभुज (गोल्डन ट्राइंगल - दिल्ली ,आगरा , जयपुर , मेवाड़ पैकेज ,हवामहल         पैकेज आदि निर्धारित करना।
8. पर्यटन विभाग द्वारा आंचलिक मेलों एवं सांस्कृतिक समारोहों का आयोजन।
9.  'एडवेंचर टूरिज्म ' के विकास की योजना तैयार करना।
10. इको ,हैल्थ ,एडवेंचर एवं धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन देना आदि।

पर्यटन ,'पधारो सा'
                           राजस्थान में पर्यटन को एक उद्योग घोषित कर दिया गया है।  रीको पर्यटन इकाइयों को औद्योगिक दरों पर भूमि उपलब्ध कराएगा।
पर्यटन इकाई के लिए भूमि का आंवटन पर्यटन इकाई नीति 2007 में प्रदत दरों के अनुसार होगा।  शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि का रूपांतरण ,रूपांतरण व विकास शुल्क से पूरी तरह मुक्त होगा।

'पधारो सा'  एक अभिनव योजना है जो गुणवत्ता सुविधाएं , बड़े पैमाने पर रोजगार , पर्यटन में लघु उद्यमियों द्वारा निवेश आदि लाभ प्रदान करते हुए निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ गुणवत्तापूर्ण 'वे साइड' सुविधाओं के विकास द्वारा पर्यटन क्षेत्र में रोजगार सृजन लक्ष्य रखा गया है।
'पधारो सा' में रेस्टोरेंट ,सुवुनियर शॉप्स, सार्वजनिक टेलीफोन ,कॉफ़ी शॉप्स  प्रकार की इकाइयां सम्मिलित होगी।
पधारो सा इकाई का डिजाइन विशिष्ट व ब्रांडेड होगी।
पधारो सा की अनुमोदित इकाइयों को प्रोत्साहन के रूप में निर्माण/नवीनीकरण की लागत का 25 प्रतिशत अधिकतम 5 लाख रूपये तक भी प्रदान किया जाएगा।

वास्तव में पर्यटन राजस्थान का एक महत्वपूर्ण उद्योग है जिससे न केवल राज्य सरकार को आय होती है अपितु यह हजारों व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करता है। इसी कारण राज्य सरकार का पर्यटन विभाग निरन्तर पर्यटन के विकास में सलग्न है। राज्य में अभी भी अनेक पर्यटन स्थल है जिनका यदि समुचित किया जाय तो पर्यटकों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो सकती है। राज्य में पर्यटन विकास की अत्यधिक संभावनाएं है। 
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Saturday, October 6, 2018

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अंतरिक्ष में भारत की जलती मोमबत्ती मोमबत्ती

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कि निचली कक्षा में स्थापित उपग्रह है यह परीक्षा में उपस्थित सबसे बड़ी कृत्रिम पति से बिना दूध के भी देखा जा सकता है सूर्योदय के पहले सूर्योदय के बाद यह सूरत गतिविधियों में दिखाई देता है यह दिन में पृथ्वी के 15 से अधिक चक्कर लगा लेता है अंतरिक्ष स्टेशन में जापान कनाडा रूस अमेरिका विच रिपीट एजेंसी की भागीदारी होने के कारण इस के नाम के साथ अंतरराष्ट्रीय विशेषण का प्रयोग वर्तमान में इसमें वर्तमान में इसमें अनेक अक्षय जी का प्रयोग रहने में जीव विज्ञान भौतिकी को शा ऊर्जा उत्पादन हेतु अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ₹900 लगे अतुल अतुल स्टेशन को बनाने वाले घटकों जान ट्रिक्स में उन्हें जोड़ जोड़ कर यह रूप दिया गया है पुराने बाबू को को अब भी निरंतर बदला जाता है पर्ची के समीप होने के कारण तरीके से सन में गुरुत्व बल होता है अगर पति के कारण स्वतंत्रता पूर्वक गिरती हुई वस्तु की तरह होता है आप जानते हैं कि स्वतंत्रता पूर्व व्यवस्था की स्थिति में होती है अंतरिक्ष कक्ष से बाहर खुले में कार्य भी कर चुकी है आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि सुनीता अपने साथ भगवत गीता की पुस्तक गणेश जी मूर्ति में कुछ समोसे भी लेकर गई थी अंतरिक्ष स्टेशन पर सरकारों ने चयनित लोग जाते हैं और वहां सरकारी नौकरी की तरह सरकार द्वारा बताए भोजन को ठंडा या गर्म करने की सीमित व्यवस्था है मगर पुराना होने पर वह बहुत सुंदर होने लगता है कुछ दिन होने के बाद परिंदा में लेने से अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव होते हैं इससे बचने के लिए व्यायाम का सहारा लेते दूर अंतरिक्ष में छोटे से कमरे जैसे स्थान पर समय समय तक डॉग साथियों के साथ रहने से कई प्रकार की हां सोचते होगे हां सोचते बहुत कचरा 123 हो गया है काम या चुप के रॉकेट या उनके टुकड़े निष्क्रिय हो चुके घरती मगर मेरे को नष्ट करने के लिए छोड़े गए हथियार रखे जिससे उनका पेंट आदि बेकार सामान अंतरिक्ष स्टेशन से टकराकर परेशानी पैदा कर सकते हैं अंतरिक्ष में चक्कर लगाते पिंटू की तेजी गति के कारण छोटे से टुकड़े कर बड़ा नुकसान कर सकती है इंटरनेट के बाद मानव पृथ्वी के बाहर बस्ती बसाने के लिए लाया तित है इसमें अंतरिक्ष बात सभी अभी से नहीं जुड़ा है आशा है आप समाचार पत्र 
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राजस्थान की पर्यटन नीति

राजस्थान की पर्यटन नीति :-
                                             राजस्थान सरकार ने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन नीति की घोषणा की है। राजस्थान सरकार द्वारा प्रथम नीति 2001 में घोषित की गई।

प्रथम पर्यटन नीति 2001 - राजस्थान की प्रथम पर्यटन नीति के निर्धारित किये गए उद्देश्य निम्न है :-
1. समृद्ध पर्यटन संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग।
2. गाँवो में रोजगार सृजन।
3. समृद्ध एवं विविध हैण्डीक्राफ्ट विकसित करना।
4. पर्यटन को जन - जन का उद्योग बनाना।
5. सामाजिक व आर्थिक विकास में पर्यटन के योगदान बढ़ाना।

  राज्य की प्रथम पर्यटन नीति में इस बात पर बल दिया गया कि राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों के उत्पाद की बिक्री तथा कलाकारों के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए राज्य सरकार अभिप्रेरक ( as motivaters ) की भूमिका निभाएगी। पर्यटन इकाइयों की स्थापना के लिये कृषि भूमि को आरक्षित दरों के एक - चौथाई दाम पर अधिकतम चार बीघा भूमि के आवंटन का प्रावधान किया गया। नये होटलों को शहरी सीमा में भूमि खरीदने पर पंजीयन शुल्क में छूट का प्रावधान किया गया। इसके अलावा नई पर्यटन इकाइयों को 5 वर्ष तक के लिये विलासिता शुल्क लेने का प्रावधान किया। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ब्याज और मनोरंजन कर में छूट का प्रावधान किया गया। प्रथम पर्यटन नीति का आकर्षक पहलू स्थानीय निवासियों को रोजगार मुहैया कराना है इस नीति में अकुशल कार्यशक्ति की शत - प्रतिशत भर्ती स्थानीय स्तर पर करना सुनिश्चित किया गया।

होटल नीति 2006 
                           राजस्थान में होटलों में जगह की मांग व आपूर्ति के बीच अंतर को पाटने के उद्देश्य से और भविष्य में पर्यटकों की वृद्धि की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार द्वारा होटल नीति 2006 की घोषणा की गयी। इस नीति में निम्न बातों को सम्मिलित किया गया है -
1. राज्य सरकार ने होटलों के लिए भूमि बैंक की स्थापना की घोषणा की।
2. होटलों एवं आवास सुविधा की आधारभूत सरंचना हेतु भूमि उपलब्ध कराने में जयपुर विकास प्राधिकरण ,स्थानीय निकाय ,ग्राम पंचायतों के अधिकारी तथा जिला कलेक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
3. नई होटल नीति में होटलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है इसमें एक ,दो,तीन,सितारा का     क्षेत्रफल 1200 वर्गमीटर तक , 4 सितारा होटल का 6000 वर्ग मीटर तक तथा 5 सितारा एवं ऊपर की श्रेणी का     18000 वर्ग मीटर तक क्षेत्रफल रखा गया है।
4. राज्य सरकार ने होटल की जमीन की बिक्री के लिए विशेष आरक्षित कीमत की घोषणा की जिसकी पालना        स्थानीय संस्थाओं को करनी होती है
5. नई होटल नीति में होटल की जमीन लेने में होटल वालों / टूर - ऑपरेटर को प्राथमिकता दी जायेगी। भूमि क्रेताओं को भूमि परिवर्तन चार्जेज में 100 प्रतिशत छूट एवं मनोरंजन कर में 100 प्रतिशत  छूट मार्च 2010 तक दी जाएगी। इसके अलावा होटल निर्माताओं को जलापूर्ति ,गृहकर आदि में रियायत दी जाएगी।
सरकार हेरिटेज होटल्स की स्थापना को प्रोत्साहन देगी।  
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राजस्थान के पर्यटन स्थल

राजस्थान के पर्यटन स्थल :-
                                             सम्पूर्ण राजस्थान पर्यटन की दृष्टि से एक अलग पहचान रखता है। यहाँ के दुर्ग ,महल और हवेलियों के अलावा शिल्प कला ,उत्स्व ,मेले और प्राकृतिक सौंदर्य देखने योग्य है। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशेष पहचान और आकर्षण है।

राजस्थान में पर्यटन स्थलों की दृष्टि से मारवाड़ ,मेवात एवं ब्रज ,हाड़ौती ,ढूंढाड़ ,मरू क्षेत्र , गोडावण ,शेखावाटी ,मेवाड़ , बागड़ आदि सभी क्षेत्र महत्वपूर्ण है। राजस्थान के पर्यटन विभाग ने देश - विदेश के पर्यटकों को ' पधारो म्हारे देश ' का बुलावा देकर राज्य में  पर्यटन हेतु आमंत्रित किया गया है।


   पर्यटन विभाग का वाक्य है - अतुल्य राजस्थान।

 1. ढूंढाड़ क्षेत्र -
                       ढूंढाड़ में राजस्थान की राजधानी जयपुर और दौसा जिले के पर्यटन स्थल आते है। विश्व में जयपुर ' गुलाबीनगर ' नाम  प्रसिद्ध है। जयपुर में कांच की कारीगरी ,प्राचीन भीति चित्र से युक्त सिटी पैलेस ,सवाई जयसिंह द्वारा स्थापित वैधशाला ,(जन्तर - मन्तर ) बिड़ला द्वारा स्थापित अंतरिक्ष ज्ञान का खजाना बिड़ला प्लेटेनेरियम ,पांच मंजिली गोल व आगे निकलते हुए झरोखे एवं खिड़कियों से युक्त स्थापत्य कला का नमूना हवामहल ,रामनिवास बाग़ प्रांगण में अल्बर्ट म्यूजियम ,चिड़ियाघर ,जयपुर राजघराने के वैभव की याद दिलाती स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण गैटोर  छतरियां ,इतिहास के गवाह जयगढ़ ,नाहरगढ़ व आमेर के किले आदि दर्शनीय  स्थल है। रामगढ़ की झील में नौकायन की व्यवस्था है।

2. मेरवाड़ा क्षेत्र :-
                           मेरवाड़ा क्षेत्र में अजमेर ,पुष्कर ,नागौर जिलों के पर्यटन स्थल आतें है। अजमेर जिले का पुष्कर हिन्दुओं का बड़ा तीर्थस्थान है। यहाँ दर्शनीय स्थलों में ब्रह्मा जी का मंदिर ,पुष्कर सरोवर मुख्य है। ऐतिहासिक नगरी अजमेर में ख्वाजा साहब की दरगाह ,ढाई दिन का झोंपड़ा ,तारागढ़ ,आनासागर ,मेयो कॉलेज सुभाष उद्यान , संग्रहालय एवं नसियाँ आदि पर्यटन स्थल है।

3. मेवात एवं ब्रज क्षेत्र :-
                                   मेवात एवं ब्रज क्षेत्र में अलवर ,भरतपुर , एवं सवाईमाधोपुर जिलों के पर्यटन स्थल आते है। अलवर के पर्यटन स्थलों में बाला किला , विनय विलास महल ,मूसी महारानी की छतरी ,पुर्जन विहार ,गवर्नमेंट म्यूजियम आदि। अलवर के समीपवर्ती स्थलों  सिलीसेढ़ ,जयसमंद ,पांडुपोल ,भृतहरि ,वैराठ नगर एवं नारायणी माता मंदिर है। अलवर में सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट भी है।

    भरतपुर केवलादेवी पक्षी अभयारण्य के जगप्रसिद्ध है। यहां के अन्य पर्यटन स्थलों में लोहागढ़ ,गवर्नमेंट म्यूजियम ,जवाहर एवं  फतह झील है। भरतपुर के निकट डीग के महल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

4. हाड़ौती क्षेत्र :-
                            इसमें कोटा, बूंदी ,बारां ,झालावाड़ , के पर्यटन स्थल आते है।  कोटा चंबल के किनारे बसा प्रुमख औद्योगिक नगर है। यहां के दर्शनीय स्थलों में गढ़ ,सिटी पैलेस ,चंबल गार्डन ,जगमंदिर ,उम्मेदभवन ,ब्रज विलास पैलेस ,छत्र विलास ,कोटा बैराज , गांधी सागर डेम और रावतभाटा परमाणु विद्युत केंद्र है। झालावाड़ के पर्यटन स्थलों में गागरोन का किला ,रेन बसेरा ,झालरापाटन के मंदिर ,डाग ,काकुनी, और भीम सागर प्रमुख है। बारां में भण्डदेवरा और सीतामाता दर्शनीय स्थल है।

 5. मरु क्षेत्र :-
                   मरु क्षेत्र के पर्यटन स्थलों में जोधपुर ,जैसलमेर ,बीकानेर और बाड़मेर के पर्यटन स्थल आते है। जोधपुर सूर्यनगरी के नाम से विख्यात है। यहां पुरातन ऐतिहासिकता वाला मेहरानगढ़ का किला है। इनके अलावा यहां उम्मेद भवन ,जसवंत थड़ा ,गिरदी कोट ,सरदार मार्केट ,मंडोर ,कायलाना झील ,ओंसिया ,सरदार समंद झील रमणीय स्थल है।

6. मेवाड़ क्षेत्र :-
                       मेवाड़ क्षेत्र में उदयपुर ,राजसमंद ,चित्तौड़गढ़ ,के पर्यटन स्थल आते है। अपूर्व प्राकृतिक छटा और सौंदर्य के गोद में सिमटा उदयपुर ' झीलों की नगरी ' के नाम से जाना जाता है ,यहां अनेक रमणीय स्थल है। पिछौला झील के मध्य स्थित जग मंदिर व जग निवास अपनी सौंदर्य और फव्वारों की अद्भुत छटा के लिए प्रसिद्ध है। वृक्षों और पुष्पों से लदे पौधे की अनुपम छटा से युक्त सहलियों की बाड़ी राजस्थान के प्रसिद्ध उद्यानों में एक है।

 7. शेखावाटी क्षेत्र :-
                             इस क्षेत्र में सीकर ,झुंझुनू एवं चूरू के पर्यटन स्थल आते है। चूरू में ढोला - मारु की चित्रकारी देखने योग्य है। अन्य स्थलों में सालासर ,हनुमान मंदिर ,पिलानी व तालछापर आकर्षक स्थल है। सीकर व झुंझुनू की हवेलियाँ दर्शनीय है। चूरू का तालछापर अभयारण्य काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध है।

8. बागड़ क्षेत्र :-
                       इस क्षेत्र में डूंगरपुर व बांसवाड़ा के पर्यटन स्थल आते है। डूंगरपुर में जूना महल ,बैणेश्वर ,गेल सागर झील तथा बांसवाड़ा में माहि बाँध ,बादल महल , त्रिपुर सुंदरी मंदिर ,रंगजी मंदिर , कागदी झील आदि पर्यटन स्थल है।

9. गोडावण क्षेत्र :-
                            इस क्षेत्र में राजस्थान का प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल माउंट आबू तथा देलवाड़ा जैन मंदिर है।  यहां अन्य पर्यटक स्थलों में नक्की झील , सनसेट पॉइंट ,गुरुशिखर मुख्य है।  रणकपुर में प्रसिद्ध मंदिर हैं।

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Friday, October 5, 2018

राजस्थान में पर्यटन

राजस्थान में पर्यटन :-
                                    भारत के पर्यटन में राजस्थान का विशेष स्थान है। राजस्थान एक ओर जहां योद्धाओं की शौर्य गाथाओं से परिचय कराता है ,वहीं दूसरी ओर शिल्पियों ,दस्तकारों ,कवियों पर भी गर्व करता है। राजस्थान के दुर्ग ,हवेलियां ,स्तम्भ ,इसके गौरवपूर्ण अतीत की याद दिलातें है। यहां की वास्तु शिल्प ,कला ,संगीत ,त्योहार एवं लोक कलाएं पुरे विश्व में पर्यटकों का आकर्षण केंद्र है। राजस्थान अपने प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्ता के कारण देशी - विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है। राजस्थान मंदिर ,मस्जिद ,दुर्ग ,अभ्यारण्य ,झीलें ,मरुस्थल आदि के कारण सुरम्य और मनमोहक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सका है।

राजस्थान के पर्यटक स्थलों का वर्गीकरण :-

1. प्राकृतिक स्थल -
                             राजस्थान को पृकृति ने अनेक सुरम्य स्थलों से संवारा है ,जिन्हें देखने का आकर्षण पर्यटकों में होता है। इसमें पर्वतीय क्षेत्र -माउन्ट आबू ,रेगिस्तानी बालुका स्तूपों का दृश्य -जैसलमेर में ,पर्वतीय घाटियाँ -आमेर की घाटी ,अलवर की काली घाटी ,देसूरी की नाल आदि।
प्राकृतिक वनस्पति एवं जीव - जन्तुओं के केंद्र -राष्ट्रीय उध्यान ,अभयारण्य ,जलप्रपात जैसे मैनाल आदि। अनेक प्राकृतिक स्थल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के केंद्र भी है।

2. ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल :-
                                                        राजस्थान का इतिहास समृद्ध रहा है और यहाँ के ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन केन्द्रों के रूप में विकसित किया गया है,इनमे प्रमुख है -
(क ) ऐतिहासिक दुर्ग - चितौड़गढ़ ,कुम्भलगढ़ (उदयपुर), नाहरगढ़ ,आमेर,जयगढ़(जयपुर ),मेहरानगढ़ (जोधपुर ),जूनागढ़ और लालगढ़ (बीकानेर ),रणथम्भौर (सवाई माधोपुर ),जैसलमेर ,जालौर ,नागौर ,शेरगढ़ के किले ,तारागढ़ (अजमेर ),लोहागढ़ (भरतपुर )आदि।

(ख)  पुरातात्विक स्थल - कालीबंगा (हनुमानगढ़ ),आहड़ और बालाथल (उदयपुर),बैराठ (अलवर),बूंदी के गुफा चित्र ,बागौर (भीलवाड़ा) आदि।

( ग ) महल और हवेलियाँ -   जयपुर ,जोधपुर ,उदयपुर ,बीकानेर ,भरतपुर,डीग,बूँदी,अलवर,सामोद के राजमहल और जैसलमेर की हवेलियाँ पर्यटकों के आकर्षण केंद्र है। शेखावाटी के अनेक किले और हवेलियाँ भी देश - विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते है।

( घ )  धार्मिक स्थल - राजस्थान के धार्मिक स्थलों में नाथद्वारा ,पुष्कर ,कोलायत ,रामदेवरा ,एकलिंग जी ,साँवरिया जी ,गलता ,केसरियाजी ,कैलादेवी ,सालासर ,खाटू श्याम जी ,जयपुर के गोविन्द देव जी का मन्दिर ,बिड़ला मन्दिर,मोती डूंगरी का गणेश मन्दिर आदि। जैन मन्दिरों में राणकपुर ,देलवाड़ा मन्दिर ,महावीर जी का मन्दिर नाकोड़ा ,पदमपुरा आदि। मुस्लिम दरगाह में अजमेर स्थित ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह सर्वाधिक प्रसिद्ध है।

( च )  सांस्कृतिक केन्द्र -  इनके रूप में ऐतिहासिक स्थलों के अतिरिक्त उत्कृष्ट स्थापत्य कला और वास्तुकला के केन्द्र राजस्थान में अनेक स्थलों पर स्थित है ,जैसे -
* जयपुर - हवामहल ,जंतर -मंतर ,चंद्रमहल ,आमेर के राजाओं की छतरी एवं मन्दिर आदि।
* जैसलमेर - पटवों की हवेली ,नथमल जी हवेली ,रामगढ़ की हवेलियाँ आदि।
* जोधपुर - जसवंत थड़ा।
* डीग -  महल।
* अजमेर - अढ़ाई दिन का झोपड़ा।
* बूँदी - चौरासी खम्भों की छतरी ,रानी जी की बावड़ी ,क्षार बाग़ की छतरियाँ।
* चितौड़गढ़ - विजय स्तम्भ ,कीर्ति स्तम्भ तथा किले पर स्थित मन्दिर।
* टोंक - 'स्वर्ण कोठी ' ,अरबी - फ़ारसी शोध संस्थान।
* कोटा - जल मंदिर के पास छतरियाँ।
* झालरापाटन - चंद्रभागा नदी के किनारे मंदिर एवं सूर्य मंदिर।
* माउण्ट आबू - देलवाड़ा के मंदिर।
* रणकपुर - जैन मंदिर।
* डूंडलोद - इमारतें ,हवेलियाँ।

(छ)  मेले -  राजस्थान के मेले सांस्कृतिक धरोहर है ,जो आज भी परम्परागत रूप में लगते है ,अतः पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है।  यहाँ के प्रसिद्ध मेले है  - पुष्कर (अजमेर), तिलवाड़ा (बाड़मेर), जसवन्त मेला (भरतपुर), करणीमाता और कपिलमुनि मेला (बीकानेर), गोगामेड़ी (हनुमानगढ़), रामदेवरा (जैसलमेर), परबतसर एवं मेड़ता मेला (नागौर), दशहरा मेला (कोटा), त्रिनेत्र गणेश रणथम्भौर (सवाई माधोपुर), केलादेवी (करौली), तीज एवं गणगौर (जयपुर), जाम्बेश्वर (मुकाम), सती मेला एवं लोहरगढ़ मेला (झुंझुनू), खाटू श्याम जी सीकर ,बैणेश्वर (डूंगरपूर) ,उर्स (अजमेर)आदि।

इनके अतिरिक्त हस्त कला के केन्द्र तथा पर्यटन विभाग द्वारा विकसित शिल्प ग्राम आदि भी पर्यटकों को राजस्थान में आकर्षित करते है।
                                 
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प्रतिरक्षा एवं रक्त समूह

मानव शरीर हर दिन अन्नकूट गानों से बढ़ियाशरीर में प्रतिरोधक क्षमता है यह प्रतिरोध क्षमता जन्म आशियां उपार्जित हो सकती है रो गानो के अनुमोदन हेतु शरीर में होने वाली क्रीम तथा संबंधित अध्ययन प्रतिरक्षा विज्ञान का जंतु कोशिका रक्त तलाशी का में क्रियाशील होती है शरीर में दो प्रकार की प्रतिरक्षा विधियां कार्य करती है यह जन्मजात प्रतिरक्षा विधि है क्योंकिक्योंकि यह प्रतिरक्षा यस यश यश यश प्रति जनों के विरुद्ध समान तरीके से कार्य करती है स्वाभाविक प्रतिरक्षा के लिए निम्न कार्य के सहायक होते हैं बत्ती करो जैसे त्वचा नासिक का चित्र तथा अन्य भागों में पाए जाने वाले पक्ष शाम तक शाम से लैस में उपकला आदि राजस्थानी औरतों जैसे आमाशय में पाए जाने वाले अम्ल में योनि कमली वातावरण त्वचा पर पाए जाने वाले रासायनिक तत्व विभिन्न देशों में पाई जाती प्रतिजन है जो शरीर में प्रविष्ट होने के पश्चात भी लसीका कोशिका को प्रतिरक्षी उत्पादक प्लाज्मा कोशिका रूपांतरित कर प्रत्यक्ष उत्पादन हेतु प्रेरित करता है तथा विशेष रूप से उस पर ही प्रतिशत प्रोटीन होता साधारण रुप से यह बाहरी रोगन अथवा पदार्थ होते हैं जिनका आणविक भार इंद्रा साहनी संगठनों के हो सकते हैं जैसे प्रोटीन फोलिक एसिड क्लिप इंडिया निखिल कभी-कभी शरीर के अंदर के प्रधान तथा कोशिका जैसे विषय में शंकर में क्या कैंसर कोशिका विभाजन के तौर पर कार्य करती है शरीर में प्रवेश होने के पश्चात प्रतिदिन का सामना सर्पदंश से होता है प्रति प्रोटीन के अलावा अन्य नशीले पदार्थ प्रतिरक्षी के साथ किया कर तो कर सकते परंतु यह पटेल के निर्माण में अधिक सक्रिय नहीं होते हैं प्रतिदिन संपूर्ण अनु के रूप में परिवर्तित करने से जुड़
यह कैसी विधि है जिसमें एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के परिजन स्वतंत्र में रहती हैं रात आधारित उत्पादों जैसे प्लेट और प्लाज्मा आदि को स्थानांतरित किया जाता है सर्वप्रथम 1667 को फ्रांस के चिकित्सक डाक्टर ज्योतिष द्वारा संपादित किया गया उन्होंने 15 वर्षीय बालक में रक्तदान चोट लगने अधिकचोट लगने शरीर में गंभीर चिंता होने पर सेल चिकित्सा के दौरान रक्त में विमान और पिता की स्थिति में हीमोफीलिया के रोग रोगियों को दात्र कोशिका रखता के रोगियों को मतदान की प्रक्रिया रक्त संग्रह प्रक्रिया से पूर्व दाता के स्वास्थ्य का परिसंचरण किया जाता है स्वास्थ्य परिसंचरण के पश्चात उपयोग क्षमता वाली युक्त तेलों में दाता से रक्त का संगठन किया जाता है संगीत रक्त का प्रतिशत भंडारण किया जाता रोका तथा कोसी की तपस्या बच्चे को धीमा किया जाता है संगीत रक्त की कई प्रकार की जान से जैसे रक्त समूह रक्तदान संग्रहण के पश्चात दाता को कुछ समय तक चिकित्सक की निगरानी में रखा जाता है ताकि उसके शरीर में रक्त दान के कारण होने वाली किसी प्रतिक्रिया का उपचार किया जा सके साधारण तेरा ज्ञान के प्रसार शरीर में कोई ऐसा सामान्य भर्ती के लिए नहीं होती मनुष्य में रक्त दान के पश्चात प्लाज्मा की 2 - 3 दिवस में अपने पूर्ति हो जाती है तथा स्थान 36 दिवस पर रक्त कोशिकाएं प्रणाली में उपस्थि पश्चात इस प्रक्रिया के पश्चात यादन संपादित किया जाता है संगीत प्रक्रिया शुरू करने से केवल 30 मिनट पर ही भंडारण क्षेत्र से बाहर नहीं देता है यह करीब 4 घंटे तक चलने वाली प्रक्रिया है जो परेशानी के माध्यम से संपादित की जाती है रोगी मैदान संबंधित भर्ती की वजह से सायनोसिस हृदय की गति की अनियमितता आदि को
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राजस्थान में भारत छोड़ो आन्दोलन का सिंहावलोकन

राजस्थान में भारत छोड़ो आन्दोलन का सिंहावलोकन :-
                                                                                    रियासतों में जन आन्दोलनों के दौरान लोगों को अनेक प्रकार के जुल्मों एवं यातनाओं का शिकार होना पड़ा। किसान आंदोलनों,जनजातीय आंदोलनों आदि ने राष्ट्रीय जागृति के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ये स्वस्फूर्त आन्दोलन थे। इनमे सामन्ती व्यवस्था की कमजोरियां उजागर हुई। यध्यपि इन आन्दोलनों का लक्ष्य राजनीतिक नहीं था ,परन्तु निरंकुश सत्ता के विरुद्ध आवाज के स्वर बहुत तेज हो गया ,जिससे तत्कालीन राजनीतिक व्यवस्था को आलोचना का शिकार होना पड़ा। यदि आजादी के पश्चात राजतंत्र तथा सामन्त प्रथा का अवसान हुआ ,तो इसमें इन आंदोलनों की भूमिका को ओझल नहीं किया जा सकता है। अनेक देशभक्तों को प्राणों की आहुति देनी पड़ी। शहीद बालमुकुन्द बिस्सा ,सागरमल गोपा आदि का बलिदान प्रेरणादायक स्रोत बने। प्रजामण्डल आंदोलनों से राष्ट्रीय  आंदोलन को संबल मिला। प्रजामण्डलों ने अपने रचनात्मक कार्यों के अंतरगर्त सामाजिक सुधर ,शिक्षा का प्रसार ,बेगार प्रथा के उन्मूलन एवं अन्य आर्थिक समस्याओं का समाधान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाये। यह कहना उचित नहीं है कि राजस्थान में जनआंदोलन केवल  संवैधानिक अधिकारों तथा उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए था ,स्वतन्त्रता के लिये नहीं। डॉ एम् एस जैन ने उचित ही लिखा है ,स्वतन्त्रता संघर्ष केवल बाह्य नियंत्रण के विरुद्ध ही नहीं होता ,बल्कि निरकुंश सत्ता के विरुद्ध संघर्ष भी  इसी श्रेणी में आते है। चूँकि रियासती जनता दोहरी गुलामी झेल रही थी। अतः उसके लिये संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति तथा उत्तरदायी शाशन की स्थापना से बढ़कर कोई बात नहीं हो सकती थी। 

रियासतों में शासकों का रवैया की खादी प्रचार ,स्वदेशी शिक्षण संस्थाओं जैसे रचनात्मक कार्यों को भी अनेक रियासतों में प्रतिबंधित कर दिया गया था।  सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध होने के कारण जन चेतना के व्यापक प्रसार में अड़चनें आयी। ऐसी कठिन परिस्थितियों में लोक संस्थाओं की भागीदारी कठिन थी। जब तक कांग्रेस ने अपने हरिपुरा अधिवेशन (1938 )में देशी रियासतों में चल रहे आंदोलनों को समर्थन नहीं दिया ,तब तक राजस्थान की रियासतों में जन आन्दोलन को व्यापक समर्थन नहीं मिल स्का। हरिपुरा अधिवेशन के पश्चात रियासती आन्दोलन राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ गया। 
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भारत छोड़ो आन्दोलन में राजस्थान की भूमिका

भारत छोड़ो आन्दोलन में राजस्थान की भूमिका :-
                                                                          भारत छोड़ो आंदोलन (प्रस्ताव 8 अगस्त शुरुआत 9 अगस्त 1942 ) के 'करो या मरो 'की घोषणा के साथ ही राजस्थान में गांधीजी की गिरफ्तारी का विरोध होने लगा। जगह - जगह जुलुस, सभाओं और हड़तालों का आयोजन होने लगा। विद्यार्थी अपनी शिक्षण संस्थानों से बाहर आ गए और आंदोलन में कूद पड़े। स्थान - स्थान पर रेल की पटरियां उखाड़ दी , तार और टेलीफोन के तार काट दिए। स्थानीय जनता ने समानांतर सरकारें स्थापित कर ली। उधर जवाब मे ब्रिटिश सरकार ने भारी दमनचक्र चलाया। जगह -जगह पुलिस ने गोलियाँ चलायी। कई मारे गये ,हजारों गिरफ्तार किये गये। देश की आजादी की इस बड़ी लड़ाई में राजस्थान ने भी कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दिया।

जोधपुर राज्य में सत्याग्रह का दौर चल पड़ा। जेल जाने वालों में मथुरादास माथुर ,देवनारायण व्यास ,गणेशीलाल व्यास ,सुमनेश जोशी ,अचलेश्वर प्रसाद शर्मा ,छगनराज चौपासनीवाला ,स्वामी कृष्णानंद ,द्वारका प्रसाद पुरोहित आदि थे। जोधपुर में विद्यार्थियों ने बम बनाकर सरकारी सम्पति को नष्ट किया। किन्तु राज्य सरकार के दमन के कारण आन्दोलन कुछ समय के लिए शिथिल पड़ गया। अनेक लोगों ने जयनारायण व्यास पर आन्दोलन समाप्त करने का दबाव डाला ,परन्तु वे अडिग रहे। राजस्थान में 1942 के आन्दोलन में जोधपुर राज्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा है ,इस आन्दोलन में लगभग 400 व्यक्ति जेल में गए। महिलाओं में श्रीमती गोरजादेवी जोशी ,श्रीमती सावित्री देवी भाटी ,श्रीमती सिरेकंवल व्यास ,श्रीमती राजकौर व्यास ने अपनी गिरफ्तारियां दी।

माणिक्यलाल वर्मा रियासती नेताओं की बैठक में भाग लेकर इंदौर आये तो उनसे पूछा गया की भारत छोड़ो आन्दोलन के संदर्भ में मेवाड़ की क्या भूमिका रहेगी ,तो उन्होंने उत्तर दिया ,"भाई हम तो मेवाड़ी है,हर बार हर -हर महादेव बोलते आये है ,इस बार भी बोलेंगे। " स्पष्ट था कि भारत छोड़ो आंदोलन  के प्रति उनका सकारात्मक रूख था। बंबई से लौटकर उन्होंने मेवाड़ के महाराणा को ब्रिटिश सरकार से संबंध विच्छेद करने का 20 अगस्त 1942 को अल्टीमेटम दिया।  परन्तु महाराणा ने इसे महत्व नहीं दिया। दूसरे दिन माणिक्यलाल गिरफ्तार कर लिये गये। उदयपुर में काम -काज ठप्प हो गया।  इसके साथ ही प्रजामण्डल के कार्यकर्ता और सहयोगिओं की गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ। माणिक्यलाल वर्मा की पत्नी नारायणीदेवी वर्मा अपने 6 माह के पुत्र को गोद में लिए जेल गयी। आन्दोलन के दौरान उदयपुर में महाराणा कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थाएं कई दिनों तक बन्द रहीं। लगभग 600 छात्र गिरफ्तार किये गये। मेवाड़ के संघर्ष का दूसरा केंद्र नाथद्वारा था। नाथद्वारा में हड़तालें और जुलूसों की धूम मच गयी। नाथद्वारा के अतिरिक्त भीलवाड़ा ,चितौड़ भी संघर्ष केंद्र थे।

जयपुर राज्य की 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में भूमिका विवादास्पद रही। जयपुर प्रजामण्डल का एक वर्ग भारत छोड़ो आन्दोलन से नहीं रहना चाहता था। इनमे बाबा हरिश्चन्द ,रामकरण जोशी ,दौलतमल भण्डारी आदि थे। ये लोग पं. हीरालाल शास्त्री से मिले। हीरालाल शास्त्री ने 17 अगस्त 1942 की शाम को जयपुर में आयोजित सार्वजनिक सभा में आंदोलन की घोषणा का आश्वासन दिया। यध्यपि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभा हुई ,परंतु हीरालाल शास्त्री ने आंदोलन की घोषणा के स्थान पर सरकार साथ हुए समझौता वार्ता पर प्रकाश डाला। हीरालाल शास्त्री ने सम्भवतः इसलिए किया कि उनके जयपुर के तत्कालीन प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल से मैत्रीपूर्ण संबंध थे तथा जयपुर के महाराजा के रवैये एवं आश्वाशन से जयपुर प्रजामण्डल संतुष्ट थे। जयपुर राज्य के भीतर और बाहर हीरालाल शास्त्री की आलोचना की गई। बाबा हरिश्चंद और उनके सहयोगियों ने एक नया संगठन 'आजाद मोर्चा ' की स्थापना कर आन्दोलन चलाया। इस मोर्चे का कार्यालय गुलाबचंद कासलीवाल के घर स्थित जयपुर के छात्रों ने शिक्षण में हड़ताल करवा दी।
इनके अलावा राजस्थान  के भरतपुर ,शाहपुरा (भीलवाड़ा ), अजमेर ,बीकानेर ,अलवर ,डूंगरपुर ,प्रतापगढ़ ,सिरोही ,झालावाड़,आदि राज्यों में भी भारत छोड़ो आन्दोलन की आग फैली। सार्वजनिक सभाएं कर देश में अंग्रेजी शाषन का विरोध किया गया। कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारियां हुई। हड़तालें हुई ,जुलुस निकाले गये। 
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Thursday, October 4, 2018

राजस्थान में परंपरागत जल संरक्षण के रूप निम्न प्रकार का है

बावड़ी चतुष्कोण इवॉल्वड कलाकार में निर्मित जल स्रोत से प्रवेश मार्ग से मध्य मार्ग तत्वों का प्रयोग किया गया है इनके आगे आंगन में भागवत ने इन भवन तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी रहती है इस वीडियो को क्लास में है राम है राम भजन ओके होते हैं इन देशों में स्थानीय जल देवता की मूर्तियां होती है राजस्थान में बढ़िया का निर्माण में उपयोग सामाजिक व राज्य के सभी जिलों में मिलती है बावरिया राज्य के सभी जिलों में मिलती है बंद इस शेर को बावरिया के अधिकता के कारण स्वयं सिटी ऑफ स्टेप वेल्स कहा जाता है इसके अलावा जोधपुर की ताप्ती बावड़ी दौसा की बावड़ी चित्तौड़ की बावड़ी आभानेरी की चांद बावड़ी तालाब में जल वर्षा जल को एकत्रित किया जाता है जो पशुधन तथा मानव के पेय जल का स्रोत राधिका शाला भवन निर्माण डालूंगा के समीप किया गया इन तालाबों के निर्माण में दारू तथा सामाजिक भावना जुड़ी रहती है इस कारण का शिक्षण तथा सुरक्षा सकती है इस कारण इनका शिक्षण तथा सुरक्षा आसानी से हो जाती है राजस्थान के प्रमुख तालाब जो तत्कालीन समय में जल स्रोत नेपाली में हेमावास आला शरी तथा में जब भीलवाड़ा में बांध किया तथा सेनापति तालाब चित्तौड़ जिले में गड़ीसर गज राज्य में बहते हुए जल का संरक्षण करने में सर्वाधिक है सर्वाधिक प्रचलित स्रोत रही है इन जिलों का निर्माण स्थानीय शासन सहकार में बंजारों के द्वारा किया गया था जो पेयजल के साथ सिंचाई के साधन के रूप में भी प्रचलित रही है इन जिलों से निकाल के बताएं यह जांच पेयजल के साथ-साथ सिंचाई के साधन के मेरे निकाल के समीप के बागों में सिंचाई कार्य किया जाता है यदि ले जाओ स्थानीय आर्थिक तथा सामाजिक वहीं अकाल तथा सूखे में जीवनदायिनी तथाकथित सागर चुरू की ताल छापर जालौर की बाकली बांध टोंक रोड नगर पालिका सरदार समंद बूंदी की नव नव लखा जेल तथा राजसमंद की झील प्रसिद्ध है प्रसिद्ध है सामान्य के तालाब का छोटा रूप होता है पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है मैदानी भाग में वर्षा जल को एकत्रित किया जाता है सामान्य रूप से चार से पांच कैदी होती है नदियों की मिट्टी पश्चिम राजस्थान में परंपरागत जल संग्रहण का जल स्त्रोतों की प्रत्येक ग्रह चक्र खेत में भूमि में हेरा गड्ढा खोदकर बनाया जाता है इस के ऊपरी भाग को पत्थरों अथवा स्थानीय उपलब्ध संसाधनों से ढक दिया जाता है इसमें गैरों की p नागौर से आने वाले वर्षा जल का संग्रहण कर दिया जाता है इस के आंतरिक भाग में राज तथा बावरी का ले कर दिया जाता है जो जल्दी सांवली के कटाव को राजस्थान में जल स्वालंबन योजना तथा अन्य योजनाओं में टांका निर्माण किया जा रहा है हरियाणा में वर्षा जल संग्रहण का साधन एस करो सामंती टांके के समान ही है परंतु उसका परिवार टांके से बड़ा तथा कलाकार और खुला होता है जिसमें बहुत हुए वर्षा जल को जल को इसके आग और के माध्यम से कटा किया जाता है यह जो हर वस्तु तथा मानव के लिए पेयजल का उत्तम होता है
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राजस्थान के प्रमुख जनपद निम्न है

वैदिक सभ्यता के विकास क्रम में राजस्थान में भी जनपदों का उदय देखने को मिलता है यूनानी आक्रमण के कारण पंजाब कुमारी अर्चना दी जाती है जो अपने सांचौर सॉरी के लिए पश्चिमी राजस्थान में आई और यहीं पर राज करने लगी इस पर का राजस्थान के पूर्वी भाग में गणपति शासन व्यवस्था का सूत्रपात हुआ प्रमुख जनपद थे जंगल वर्तमान बीकानेर और जोधपुर के जिले में जांगल देश का नाम छतरपुर थे जिससे इस समय नागौर कहते हैं बीकानेर के राजा इसी जांगल देश के स्वामी होने के कारण राज्य के राज सिंह में भी जंगल दरबार से लिखा मिलता है यह मंदिर वर्तमानवर्तमान जयपुर के आसप व्हाट्सएप मत्स्य महाजनपदमत्स्य महाजनपद के चंबल के पास की पहाड़ियों से लेकर सरस्वती आधुनिकआधुनिक अलवर और भरतपुर के इसकी राजधानीइसकी राजधानी विराटनगर मेरठ के नाम से जाना जाता है मोरी साथ-साथ बिंदुसार से पहले मत तक यह स्पष्ट जानकारी का अभाव में महाभारत में कहा गया है कि आज की राजनीति पर  मत्स्य पालन में चेदि राज्य का हाल और कालांतर में यह विशाल मगध साम्राज्य का अंग बन गया शूरसेन आधुनिक व क्षेत्र में यह स्थिति स्थिति स्थिति प्राचीन यूनान किस राज्य कोआधुनिक व तथा राजधानी को मथुरा कहते थे महाभारत के अनुसार यहां बिंदु यादव वंश का शासन था भरतपुर धौलपुर करौली जिले के अधिकार शूरसेन जनपद के अंतर्गत आते थे अलवर जिले का पूरी बाग मिशन के अंतर्गत आता था वासुदेव के पिता जनपद की राजधानीजनपद की राजधानी शिवपुर जनपद की राजधानी शिवपुर की तथा राज्य सूची ने उसे अन्य जातियों के साथ 10 राज्यों के युद्ध में पराजित किया था प्राचीन शिवपुर की पहचान वर्तमान पाकिस्तान ने के स्वर कोर नामक स्थान से की जाती थी कालांतर में दक्षिण पंजाब की जेसीबी जाति राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में निवास करने लगी चित्तौड़ चि चित्तौड़ चित्तौड़ के पास स्थित नगरीनगरी इस जनपद की मोर के अनेक स्थानों से सीढ़ियों के सिक्के भी प्राप्त हुए मंदसौर के पास पांच वाले प्राचीन सचिव जनपद के पश्चात पश्चिम से लेकर दक्षिण पूर्व तक होना तथा गणतंत्र आत्मक शासन प्रणाली के बावजूद इन जनपदों को सत्ता कुल्लू इन परिवारों के हाथों में ही 3 परिवारों में प्रतिनिधि संस्था के प्रमुख के रूप में शासन की व्यवस्था का संस्था के सदस्य निर्धारित विषय पर अपने विचार व्यक्त राज्य की नीति के आधारभूत नियमों का निर्धारण तथा विशालगढ़ में केंद्रीय संस्थान राजस्थान चुरु की विस्तार राजनीति न्यू नातिन रूप से इन के पतन के लिए उत्तरदाई थी उत्तर दायि
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गुरु गोविन्द सिंह का संक्षिप्त परिचय

गुरु गोविन्द सिंह :- 
                             गुरु गोविन्द सिंह तेगबहादुर के पुत्र थे। ये सिखों के दसवें गुरु और अन्तिम गुरु थे। पंजाब पर औरंगजेब के अत्याचारों का विरोध करने हेतु उन्होंने शस्त्र और शास्त्र शिक्षा हेतु शिक्षण केंद्रों का विकास किया। इससे सिक्ख सम्प्रदाय सक्षम बना।
लाहौर के सूबेदार को ' नदौण के युद्ध ' में पराजित किया। सिक्खों को सुसंगठित करने ,उनकी कुरीतियां हटाने एवं नवचेतना जागृत करने के उद्देश्य से खालसा पंथ की स्थापना 1699 में की।
बलिदानी पांच भक्तों द्वारा पंज प्यारों ,पाहुल ( चरणामृत ) एवं अमृत छकाणा ( पतासे घुला पानी )की नई प्रथा प्रारम्भ की।
खालसा पंथ के सिक्खों को पांच ' ककार ' अर्थार्त कड़ा ,केश ,कच्छ ,कृपाण , और कंघा रखना आवश्यक था।
ओरंगजेब से युद्ध की आशंका के कारण उन्होंने 1699 में ही आनंदपुर साहिब में एक सैनिक केन्द्र खोल दिया।
गुरु गोविंद सिंह धार्मिक स्वंतत्रता एवं राष्ट्रीय उन्नति का ऊँचा आदर्श रखते हुए सिक्खों के उतकर्ष में लगे रहे। 1705 में मुगलों के आक्रमण के कारण उन्हें आनन्दपुर छोड़ना पड़ा। आनंदपुर में छूटे दोनों पुत्रों जोरावर सिंह व फतेह सिंह को कैद कर सरहिन्द के किले में दीवार में जिन्दा चुनवा दिया गया, परन्तु उन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया।
चमकौर के युद्ध में अपने अन्य दो पुत्र अजीत सिंह व जुंझार सिंह शहीद हुए।
खुदराना के संघर्ष में चालीस सिक्खों ने वीरगति प्राप्त की ,उन्हें 'मुक्ता ' एवं स्थान को मुक्तसर कहा गया।
गुरु गोविन्द सिंह आनन्दपुर से अंततः तलवंडी पहुँचे जहाँ एक वर्ष तक उन्होंने साहित्यिक लेखन का कार्य।
ओरंगजेब के निमंत्रण पर वे मिलने जा रहे थे ,तभी ओरंगजेब की मृत्यु का समाचार मिला।
 1 अक्टूबर 1708 को गुरु गोविन्द सिंह परलोक सिधार गए।  
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संचार सेवा

संचार सेवा :-
                    जब से मानव पृथ्वी पर अवतरित हुआ है,उसने विभिन्न संचार माध्यमों का प्रयोग किया है। प्रगति के पथ पर मानव बहुत दूर चला आया है। जीवन के हर क्षेत्र में कई ऐसे मुकाम प्राप्त हो गए है जो हमे जीवन में सभी सुविधाएँ व आराम प्रदान करते है। आज संचार मानव की मुठ्ठी में समाया हुआ है तथा संचार क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाये गये है। अनेक नये स्रोत ,नये साधन और सुविधायें प्राप्त कर ली गयी है जो हमें आधुनिकता के दौर में काफी ऊपर लाकर खड़ा करती है।

सन्देश प्राप्तकर्ता या सन्देश भेजने वाले के गतिविहीन रहते हुए भी लम्बी दूरी का संचार बहुत आसान है। निजी दूरसंचार तथा जन संचार में दूरदर्शन ,रेडियो,समाचार -पत्र  समूह ,प्रेस तथा सिनेमा ,इंटरनेट ,केबल ,मोबाइल उपग्रह आदि देश के प्रमुख संचार साधन है। भारत  डाक संचार तंत्र विश्व का वृहत्तम है यह पार्स्ल ,निजी पत्र व्यवहार ,स्पीड पोस्ट आदि को संचालित करता है। कार्ड व् लिफाफा ,बन्द चिट्ठी पहली श्रेणी की डाक समझी जाती है तथा इन्हें विभिन्न स्थानों तक बस ,रेल तथा वायुयानों व जल परिवहन की सहायता से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचायी जाती है।

आधुनिक संचार के साधन में प्रमुखतः -टेलीफोन ,इन्टरनेट व मोबाइल सेवाएं है।

इन्टरनेट :-
                  इंटरनेट  शुरुआत 1969 में हुई थी उस समय एक सिमित क्षेत्र में ही इन नेटवर्किंग का उपयोग सूचनाओं के आदान - प्रदान के लिए होता था 1972 में ई -मेल  शुरुआत ने संचार जगत में क्रान्ति की शुरुआत की। ई - मेल की सहायता से कोई भी संदेश सूचना इत्यादि कुछ ही सैकंड में विश्व के किसी  भी कोने में भेजी जा सकती है जहाँ इन्टरनेट सेवा  है।  . ई -मेल के द्वारा ही संदेश हजारों व्यक्तियों को एक साथ भेजा जा सकता है। इंटरनेट की सहायता से वीडियो कॉन्फ्रेंसिग भी की जाती है जो खर्चीली है तथा समय की बचत करती है इसके द्वारा देश विदेश के अलग जगह बैठे कई व्यक्ति श्रव्य दृश्य के माध्यम से आपस वार्तालाप कर सकते है।

इंटरनेट के माध्यम से चित्र एवं चलचित्र भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी व शीघ्रता से भेजे व देखे जा सकते है विश्व के किसी भी कोने में घटित प्रमुख घटना की जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान के व्यक्तियों तक शीघ्रता से पहुंच जाती है।

इंटरनेट सेवाएं टेलीफोन लाइनों के माध्यम से ब्रॉड बैंड सेवाओं तक मोबाइल सेवाओं के 2जी ,3जी ,4जी ,नेटवर्कों के माध्यम से प्राप्त होती है।


टेलीफोन :-
                 संचार का एक महत्वपूर्ण साधन टेलीफोन है इसका आविष्कार ग्राहमबोल ने किया इसके पश्चात इसकी कार्यप्रणाली में तेजी से सुधार आता गया। इसकी सहायता से अलग -अलग स्थानों पर बैठें व्यक्ति आपस में बात कर सकतें है तथा सूचनाओं का आदान प्रदान कर सकते है।  टेलीफोन सेवाओं में एस.टी.डी.व आई.एस.डी. सेवाओं में देशों व शहरों के अंकीय कोड निर्धारित है जिन्हें टेलीफोन नंबर के पहले डायल कर सीधे ही बिना किसी इन्तजार के बात की जा सकती है।


मोबाइल :-
                   टेलीफोन संचार सेवाओं के क्षेत्र में मोबाइल फोन सेवाओं के आविष्कार से एक महत्वपूर्ण क्रान्ति आ गई। मोबाइल सेवाओं से किसी भी व्यक्ति (जो मोबाइल फोन सेवा का उपयोग कर रहा है )से सीधे ही बात की जा सकती है मोबाइल सेवाओं द्वारा तीव्र गति की इंटरनेट सेवाएं 3जी व 4 जी उपलब्ध है जिनके द्वारा वीडियो कालिंग सुविधा उपलब्ध है विभिन्न मोबाइल ऐप्लिकेशन ने भी संचार सेवाओं को आसान व तीव्र बना दिया है तथा दिन प्रतिदिन इन सेवाओं में नई तकनीकी का आविष्कार हो रहा है।
              
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राष्ट्रीय आय का सामान्य परिचय के बारे में देखें और पढ़ें

प्रतिदिन के जीवन में अनेक बार आज शब्द का प्रयोग करते हैं किसी भी व्यक्ति या परिवार के कल्याण को देखने हेतु सर्वाधिक उपयोगी कार्य काल को माना जाता है हम सब यह जानते हैं कि आखिर जाने कमाते निर्धारित नहीं है जिससे व्यक्ति के कल्याण के अंदर यह व्यक्ति या परिवार की और बड़ी सीमा तक उसके भौतिक जीवन सामाजिक परिस्थितियों तथा आर्थिक प्रगति के परिवार की बनती है कि रास्ते की आज्ञा शक्ति राष्ट्रीय आय की गणना की आर्थिक प्रगति का ज्ञान होता है अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों का योगदान एवं उनके साथ पिक्चर में थोड़ी जानकारी मिलते राष्ट्रीय आय के अनुमान के आधार पर राष्ट्रीय आय का अर्थ यह था कि आरती निष्पादित का मंदिर कहां पर है इससे देश के उत्पादन के साधनों द्वारा एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादक समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मोदी मुरली के रूप में परिभाषित किया जाता है ध्यान रहे कि राष्ट्रीय आय में देश की अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मुझे कोई शामिल किया जाता है अंतिम वस्तु या सेवा व्यवस्था होती है जिसका उत्पादन प्रक्रिया पूर्ण नहीं किया जा सकता है इसका उत्पादन प्रक्रिया पुणे पर शंकर नहीं किया जा सकता है साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय आदेश के उत्पादन के सभी साधनों की आय का यो होती है कि देश के व्यक्तियों की आएगा 1 अप्रैल से 30 मार्च तक होता हैइ उत्पादन उत्पादन होता है देश के सभी साधन अपने संयुक्त प्रयास दवारा मूल्य के अंतिम वस्तु है तथा सेवाएं उत्पादित करते हैं देश में उत्तर ही सही मूल्य की मूर्ति का निर्माण होता है इसलिए वर्तिका सभी साधनों के स्वामियों को विस्तारित किया जाता है साधनों का मुख्य उनकी सेवाओं का पुरस्कार दिया जाता है उनको मजदूरी भुगतान मूर्ति के समान होता मूर्ति के समान होता है इस प्रकार घरेलू साधनाए का तालू देश की घरेलू शिव मंदिर पर होने वाली से आई है राष्ट्रीय आय के नए रूप होते हैं जिन्हें राष्ट्र एक रिक्वेस्ट है कि नहीं पदार्थों को मापने हेतु प्राइस सकल उत्पाद को अधिक उपयोग में लिया जाता है वित्त वर्ष दौरान देश की घरेलू सीमाओं में उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मोदी मूल्यों का योग सकल घरेलू उत्पादन प्रति व्यक्ति आयएक अर्थ यह जनसंख्या में परिवर्तन के प्रभाव को सुनाया जाए फिर नहीं कर सकता जनसंख्या में परिवर्तन के प्रभाव को गणना में शामिल गाना में शामिल करना प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय की तुलना में आर्थिक कल्याण एवं आर्थिक विकास का उपयोग में अज्ञात राष्ट्रीयराष्ट्रीय आय बता गण जनसंख्या स्वतंत्रतास्वतंत्रता से पूर्व भार भारत में राष्ट्रीय आय की प्रथम गणना श्री दादा भाई नौरोजी द्वारा से 868 ईसवी में की गई है इन के पश्चात दादा डॉक्टर वीके आरवी राव आदि इत्यादि के द्वारा भी राष्ट्रीय आय के अनुमान लगाए जाते हैं इन सभी दोनों ने राष्ट्रीय आय की गणना
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